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बाल झड़ने के कारण और आयुर्वेदिक हर्बल उपचार Hair loss causes and ayurvedic herbal treatment आजकल बाल झड़ना एक आम समस्या बन चुकी है। पुरुष हों या महिलाएँ, लगभग हर कोई इस समस्या से परेशान है। गलत खान-पान, तनाव, प्रदूषण और केमिकलयुक्त उत्पादों के कारण बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और धीरे-धीरे बाल गिरने लगते हैं। आधुनिक जीवनशैली में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। परंतु आयुर्वेद और हर्बल उपायों के माध्यम से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। बाल झड़ने के मुख्य कारण 1. तनाव (Stress): लगातार चिंता और तनाव से शरीर का संतुलन बिगड़ता है और बालों की ग्रोथ पर असर पड़ता हैं। 2. गलत आहार: विटामिन, मिनरल और प्रोटीन की कमी से बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। 3. हार्मोनल असंतुलन: महिलाओं में गर्भावस्था, प्रसव और मेन...
आयुर्वेद क्यों कहता है ज़्यादा तेल से तौबा करें? - जहाँ संयम है, वहीं स्वास्थ्य का संगम है - भारतीय रसोई घरों में तेल की महक केवल स्वाद नहीं लाती, बल्कि भावनाओं की भी परतें खोलती है। गरमा-गरम पराठे, सब्ज़ी में तड़का, और त्योहारों के पकवान इन सबमें तेल एक अहम भूमिका निभाता है। लेकिन यही तेल जब हद से ज़्यादा हो जाए, तो यह स्वाद से ज़्यादा रोग का कारण बन सकता है। आयुर्वेद में तेल को 'स्निग्ध' तत्व माना गया है, यानी वह जो शरीर को चिकनाई, ऊर्जा और पोषण देता है। लेकिन यही स्निग्धता अगर 'अतिस्निग्ध' बन जाए, यानी ज़रूरत से ज़्यादा, तो यह दोषों को बिगाड़ देती है खासकर कफ और पित्त दोष को। आयुर्वेद तेल को क्यों सीमित मात्रा में खाने की सलाह देता है? 1. जठराग्नि को धीमा करना तेल की अधिकता शरीर की जठराग्नि को मंद कर देती है -यानी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इससे भोजन अच्छे से नहीं पचता और 'आम' (विषैले अपचित तत्व) बनता है। 2. कफ दोष में वृद्धि बहुत ज़्यादा तले हुए व भारी तेलीय पदार्थ कफ को बढ़ाते हैं, जिससे नज़ला, खांसी, एलर्जी, वजन बढ़ना और आलस्य जैसे लक्षण पैदा होते हैं। ...
सोरायसिस (Psoriasis ) आयुर्वेद में सोरायसिस (Psoriasis) को त्वचा संबंधी विकारों में शामिल किया जाता है और इसे "किटिभ कुष्ठ" या "एक्कुष्ठ" के नाम से जाना जाता है। यह एक पुरानी त्वचा रोग है जिसमें त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, सूजन और शुष्क, मोटी त्वचा की परतें बन जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सोरायसिस मुख्यतः दोषों (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन के कारण होता है। कारण (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से) 1. असात्म्य आहार-विहार: जैसे अत्यधिक तले-भुने, मसालेदार, और विषम आहार का सेवन। 2. मनोवैज्ञानिक कारण: तनाव, चिंता और गुस्से का बढ़ना। 3. विहार दोष: अनुचित दिनचर्या, देर रात तक जागना, और व्यायाम की कमी। 4. वात-पित्त असंतुलन: वात और पित्त दोष त्वचा को प्रभावित कर सोरायसिस का कारण बनते हैं। आयुर्वेदिक उपचार 1. पंचकर्म: शरीर को शुद्ध करने और दोषों के संतुलन के लिए पंचकर्म चिकित्सा विशेष रूप से उपयोगी है। वमन: शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालना। विरेचन: आंतों की सफाई। बस्ती: औषधीय एनिमा के माध्यम से दोषों का संतुलन। रक्तमोक्षण: रक्...
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