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वायरल बुखार का आयुर्वेदिक समाधान (ayurvedic solution for viral fever)

            वायरल बुखार का आयुर्वेदिक समाधान वायरल बुखार एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जो मौसम परिवर्तन, दूषित जल या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह बुखार त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन से उत्पन्न होता है। इस रोग में शरीर में थकान, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, गले में खराश और कमजोरी जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। आयुर्वेद में वायरल बुखार के उपचार के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और घरेलू उपायों का सहारा लिया जाता है, जो इम्यूनिटी को बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। वायरल बुखार के लक्षण (Symptoms of Viral Fever) 1. तेज बुखार 2. सिरदर्द और बदन दर्द 3. गले में खराश और खांसी 4. ठंड लगना 5. थकान और कमजोरी 6. जोड़ों में दर्द 7. भूख में कमी आयुर्वेद में वायरल बुखार के मुख्य कारण दूषित आहार और जल शरीर की इम्यूनिटी का कमजोर होना मौसम में बदलाव अधिक ठंडा या गरम खाद्य पदार्थों का सेवन मच्छरों या कीटों का संक्रमण आयुर्वेदिक समाधान (Ayurvedic Remedies for Viral Fever) 1. गिलोय (Tinospora Cordifolia) गिलोय को ‘अमृता’ कहा...

Ayurvedic knowledge unsustainable velocity (अधारणीय वेग)

  अधारणीय वेग( (वे वेग जो कभी नहीं रोकना चाहिए) १३ प्रकार के वेग किसी न किसी शरीर क्रिया से संम्बन्धित है जो स्वभाविक होते हैं। उन्हें यदि रोका जाता हैं तो अनेको व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती है। जिन्हें बुद्धिमान व्यक्ति कभी नहीं रोकते है। •>मूत्र रोकने से होने वाले रोग मूत्र कृच्छ, पेशाब में जलन, पेडू में दर्द, शिर में वेदना। •>पुरीष (मल) वेग को रोकने से होने वाले रोग सिर में दर्द, कोष्ठ वद्धता, आध् मान, उदरशूल। •>शुक्रवेग को रोकने से होने वाले रोग वृषण में दर्द, अंगमर्द, हृदय में वेदना, मूत्र का रूक-रूक कर आना। •>अपान वायु के वेग को रोकने से होने वाले रोग वात व्याधियाँ, कब्ज, उदर शूल, थकान, आध्मान। •>वमन का वेग को रोकने से होने वाले रोग कण्डू, भोजन में अरूचि, पाण्डू, ज्वर, चर्म विकार। •>छींक का वेग रोकने से होने वाले रोग शिरःशूल, जीर्ण, प्रतिश्याय, अर्दित। •>डकार के वेग को रोकने से होने वाले रोग हृदय और छाती में जकड़ाहट। हिचकी, श्वास, भोजन में अरूचि •>जम्हाई के वेग को रोकने से होने वाले रोग आक्षेप, शून्यता, शरीर तथा हाँथ पैरो में कम्प, उर्ध्वजत्रगुत रोग। •...

Ayurvedic knowledge शयन के नियम/Bedtime Rules

             *शयन के नियम/Bedtime Rules :-* 1. *सूने तथा निर्जन* घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। *देव मन्दिर* और *श्मशान* में भी नहीं सोना चाहिए। *(मनुस्मृति)* 2. किसी सोए हुए मनुष्य को *अचानक* नहीं जगाना चाहिए। *(विष्णुस्मृति)* 3. *विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल*, यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों, तो *इन्हें जगा* देना चाहिए। *(चाणक्यनीति)* 4. स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु *ब्रह्ममुहुर्त* में उठना चाहिए। *(देवीभागवत)* बिल्कुल *अँधेरे* कमरे में नहीं सोना चाहिए। *(पद्मपुराण)* 5. *भीगे* पैर नहीं सोना चाहिए। *सूखे पैर* सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। *(अत्रिस्मृति)* टूटी खाट पर तथा *जूठे मुँह* सोना वर्जित है। *(महाभारत)* 6. *”नग्न होकर/निर्वस्त्र”* नहीं सोना चाहिए। *(गौतम धर्म सूत्र)* 7. पूर्व की ओर सिर करके सोने से *विद्या*, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से *प्रबल चिन्ता*, उत्तर की ओर सिर करके सोने से *हानि व मृत्यु* तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से *धन व आयु* की प्राप्ति होती है। *(आचारमय़ूख)* 8. दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु *ज्येष्ठ मास* में द...

Ayurvedic knowledge

❤️❤️          चूना:- (Pan ke saath Khane wala) 💜चूना अकेले ही 70 बीमारियां ठीक करता है 💚गेंहू के दाने के बराबर चूना,गन्ने के रस में, गुड़ में आदि सर्वोत्तम है 💚खाली पेट चुना खाये तो सबसे अधिक लाभ है, रस या गुड़ के साथ 💚खून की कमी हो,तो अनार के रस में चूना मिलाकर खाये 💚जिस किसी को पीलिया हो, गन्ने के रस में गेंहू के दाने के बराबर प्रतिदिन चुना दे, पीलिया बहुत जल्दी ठीक होता है 💚अगर किसी को लीवर मे सुजन आ जाए तो चुने से सबसे जल्दी ठीक होता है 💚जिन्होंने शराब पी पी के अपने लीवर खराब कर लिए है, उनकी सबसे अच्छी दवा चुना है 💚यदि गन्ने का रस ना हो तो गुड़ में मिलाकर चूना दे 💚जिन बच्चों की लंबाई नही बढ़ रही हो, उन्हें गन्ने के रस या गुड़, या दाल या दही या फिर हल्के गुनगुने पानी में गेंहू के दाने के बराबर चूना दे, 1 साल तक 💚जो बच्चे दिमाग से थोड़े कमजोर बच्चे होता है या जो देर मे सुनते औऱ समझते है,या देर में चलना सीखते है उन्हें भी 2 साल लगातार चूना दे 💚जो बच्चे बहुत कमजोर है, जिनकी हड्डियाँ दिखाई देती है, ऐसे बच्चो के लिए चुना सबसे अच्छी दवा है 💚किसी को भी दांत मे...

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                              Navel/नाभि:- 💚गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है। 💚गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है। 💚नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है 💚हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है। 💚जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का। 💚नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है। 💜आँखों का शुष्क हो जाना:- नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये सोने से पहले 3 से 7 बूँदें श...

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                   *अगर ब्लैडर चोक हो जाए...*            मूत्राशय भरा हुआ है,  और पेशाब नहीं हो रहा है,  या पेशाब करने में असमर्थ हो रहे हैं.. तो क्या करें?? 👉 यह एक प्रसिद्ध एलोपैथी चिकित्सक 70 वर्षीय ईएनटी विशेषज्ञ का अनुभव है।   आइए सुनते हैं अनुठा अनुभव..👉    एक सुबह वे अचानक उठे। उन्हें मुत्रत्याग करने की जरूरत थी, लेकिन वे कर नहीं सके (कुछ लोगों को बाद की उम्र में कभी-कभी यह समस्या होती है)। उन्होंने बार-बार कोशिश की, लेकिन लगातार कोशिश नाकाम रही। तब उन्होंने महसूस किया कि एक समस्या खड़ी हो गयी है। एक डॉक्टर होने के नाते, वे ऐसी शारीरिक समस्याओं से अछूते नहीं थे; उनका निचला पेट भारी हो गया। बैठना या खड़े़ रहना दुस्वार होने लगा, तल-पेट में दबाव बढ़ने लगा । तब उन्होंने एक जाने-माने यूरोलॉजिस्ट को फोन पर बुलाया और स्थिति के बारे में बताया। मूत्र-रोग विशेषज्ञ ने उत्तर दिया: "मैं इस समय एक बाहरी क्षेत्र के अस्पताल में हूँ, और आपके क्षेत्र के क्लिनिक में दो घंटे में पहुँच पा...

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खाना खाने के बाद पेट मे खाना पचेगा या खाना सड़ेगा ये जानना बहुत जरुरी है ...    हमने रोटी खाई,हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी , दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|, ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है | पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय" उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"| उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है " epigastrium "| ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है। ये बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |  हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है| आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे"जठराग्न"। |ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है । ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी | यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई| ये अग्नि तब तक ...

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सरसो का तेल:-Mustard oil:- > सरसों का तेल खाने के लिए उत्तम है,आयुर्वेद में सरसों के तेल कों तिल के तेल के समान ही उत्तम माना जाता है >सरसों के तेल में कोलैस्ट्राल का स्तर कम होने के कारण ह्रदय रोगों में भी यह लाभदायक बताया जाता है >हाथों की खुश्की- हाथों में खुशकी और खुदरापन होने की स्थिति में सरसों के तेल से हल्की मालिश करें , त्वचा मुलायम हो जाएगी > शरीर दर्द और थकान- शीत मौस्म में धूप में बैठकर सभी उम्र के लोगों को तेल की मालिश करनी चाहिए | शिशुओ को धूप में लिटाकर इस तेल से मालिश करने से उनकी थकान दूर होती है , नींद अच्छी आती है, तथा शरीर के दर्द से राहत मिलती है सरसों का तेल वातनाशक और गर्म होता है । इसी कारण शीतकाल में वातजन्य दर्द को दूर करने के लिए इस तेल की मालिश की जानी चाहिए । जोडों का दर्द , मांसपेशियों का दर्द , गठिया , छाती का दर्द, ब्रोंकाइटिस आदि की पीड़ा भी सरसों के तेल से दूर हो जाती है । >उबटन- बेसन में सरसों का तेल मिलाकर उबटन की तरह त्वचा पर मलने से त्वचा गोरी हो जाती है तथा उसमें कमल के समान ताजगी आ जाती है । ...

Ayurvedic knowledge / आयुर्वेदिक ज्ञान health tips

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Benefits of Calabash/लौकी:- आपको बता दें कि लौकी में विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन और सोडियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. लौकी में आयरन की मात्रा भरपूर पाई जाती है. जो हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा कर सकती है. लौकी को डाइट में शामिल कर हम आसानी से वजन को कंट्रोल कर सकते हैं "Bottle Gourd Benefits and Side Effects Nutrient Rich: Bottle gourd, commonly known as calabash or Lauki, contains important minerals. It contains vitamins C, B, and K, as well as minerals like calcium, magnesium, iron, and zinc" 💚लौकी में पानी 96.1%; कार्बोहाइड्रेट 2.5%; प्रोटीन 0.2%; वसा 0.1%, रेशा 0.6%; होता है, सोडियम 1.8; मैग्नीशियम 5.0, पोटेशियम 87.0; कैल्शियम 20.2; ताँबा 0.3, लोहा 0.7; फॉस्फोरस 10, गंधक 10; विटामिन बी 1 0.03; विटामिन बी-5 0.2; विटामिन सी 6.0-ये प्रति 100 ग्राम में , मि.ग्रा. की मात्रा में पाये जाते हैं। तथा 100 ग्राम लौकी से 12 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। 💛पानी को कमी (De-hydration)- उल्टी, दस्त, त...

Knowledge of Ayurveda

                Knowledge of Ayurveda   💚 कान का दर्द – हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल को छानकर इस तेल की बूंदें कान में डालने से कान दर्द से राहत मिलती है। 💚 शक्ति शारीरिक शक्ति बढ़ाने या कमजोरी दूर करने के लिए भुनी हींग, पीपर, सोंठ तथा कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। प्रतिदिन सुबह-शाम चौथाई चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें। 💚 मासिक धर्म मासिक धर्म की समस्याओ में हींग का सेवन करने से स्त्रियों के गर्भाशय का संकुचन होता है और मासिक धर्म खुलकर आता है। इसके अतिरिक्त इससे स्त्रियों का पेट दर्द भी दूर होता है। 💚 प्रसूता स्त्री का सिर चकराना – घी में सेंकी हुई हींग देशी घी/गाय का घी के साथ सेवन करने से प्रसूता स्त्री को आने वाले चक्कर (सिर चकराना) और दर्द (लेबरपेन्स) मिटते हैं। 💚 विषैले दंश :- बिच्छू, ततैया, मधु मक्खी आदि के काटने पर काटे गए अंग पर लगाने से दर्द और सूजन दूर होते हैं। 💚 मलेरिया से सुरक्षा – जिन जगहों पर मलेरिया फैला हो वहां भोजन के साथ हींग का सेवन करने से आंतों को लाभ होता है तथा मलेरिया से भी सुरक्षा होती...