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मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान /Advantages and disadvantages of drinking fenugreek water –

  मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान – मेथी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग शायद आप सभी करते हैं। लेकिन मेथी का पानी पीने के फायदे भी कम नहीं हैं,  यह मेथी में मौजूद पोषक तत्‍वों को ग्रहण करने का यह सबसे अच्‍छा तरीका है। मेथी का पानी पीने से कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है। मेथी का पानी पीने के लाभ विशेष रूप से वजन कम करने में, रक्‍त शर्करा नियंत्रित करने में, रक्‍त चाप नियंत्रित करने में, पाचन को ठीक करने, पथरी का इलाज करने आदि में होते हैं। इस आर्टिकल में आप मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान जानेगें। आइए इन्‍हें जाने। प्रकृति में गर्म होने के कारण मेथी के दानों का उपयोग भोजन पकाने के दौरान बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है। यहां तक की औषधीय उपयोग में भी मेथी की कम मात्रा ली जाती है। लेकिन मेथी के औषधीय गुणों की भरपूर मात्रा प्राप्‍त करने के लिए मेथी के पानी का उपयोग भी किया जाता है।  1 कप मेथी का पानी बनाने के लिए 1 छोटा चम्‍मच मेथी पर्याप्‍त होती है। इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए साथ इस पानी को गर्म करना अतिरिक्‍त लाभ दिला ...

आयुर्वेद में गठिया (आर्थराइटिस) का उपचार

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       आयुर्वेद में गठिया (आर्थराइटिस) का उपचार गठिया (Arthritis) एक आम लेकिन दर्दनाक बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई होती है। आयुर्वेद में इसे "आमवात" कहा जाता है। यह समस्या मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन और शरीर में विषाक्त पदार्थों (आम) के इकट्ठा होने के कारण होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा प्राकृतिक तरीकों, जड़ी-बूटियों, आहार और जीवनशैली में बदलाव के जरिए गठिया का उपचार करती है। गठिया के कारण (Causes) आयुर्वेद के अनुसार गठिया के प्रमुख कारण हैं: •वात दोष का असंतुलन – ठंडी, शुष्क और अस्थिर प्रकृति के कारण वात बढ़ता है। •अमलकारी पदार्थों का सेवन – तली-भुनी, मसालेदार और खट्टी चीज़ें आम बढ़ाती हैं। •पाचन तंत्र की कमजोरी – अपच से बनने वाला आम (विषाक्त पदार्थ) जोड़ों में जमा होकर सूजन और दर्द पैदा करता है। •गलत जीवनशैली – देर रात तक जागना, अनियमित खान-पान और व्यायाम की कमी। लक्षण (Symptoms) जोड़ों में दर्द और सूजन सुबह के समय जकड़न चलने-फिरने में कठिनाई हल्का बुखार और थकान जोड़ों में लालिमा और गर्माहट आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Tr...

हठ योग प्रदीपिका(Hatha Yoga Pradipika)

                        *हठ योग प्रदीपिका*  *अध्याय 3ए - मुद्रा (1-60 श्लोक)* 1. जैसे सर्पों का सरदार पृथ्वी को सहारा देता है, वैसे ही कुण्डलिनी योग-तंत्र को सहारा देती है । 2. जिस प्रकार गुरु की कृपा से सुप्त कुण्डलिनी जागृत हो जाती है, वह छह कमलों और गांठों को भेद देती है। 3. प्राण राजपथ पर शून्यपदवी (शून्य स्थिति) की ओर चला जाता है , मनुष्य तर्क और मृत्यु के भ्रम से मुक्त हो जाता है। 4. सुषुम्ना, सूर्यपदवी (शून्य की स्थिति), ब्रह्मरंद्र (ब्रह्म में प्रवेश) , महापथ (मुख्य मार्ग) , स्मशान ( श्मशान भूमि) , शांभवी, मध्यमार्ग (मध्य मार्ग) एक ही बात को संदर्भित करते हैं। 5. इसलिए, व्यक्ति को शक्तिशाली देवी (कुंडलिनी) को जागृत करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए, मुद्राओं का अच्छे से अभ्यास करना चाहिए। 6. महामुद्रा, महाबंध, महावेध, केचरी, उड्डियाना, मूलबंध और जालंधर बंध। 7. विपरीतकरणी, वज्रोली और शक्तिकलाना; ये दस मुद्राएं हैं जो बुढ़ापे और मृत्यु का नाश करती हैं। 8. इन्हें सबसे पहले आदिनाथ ने सिखाया था और ये साधक को आठ सिद्...