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रूसी ( hair Dandruff) उपचार/ बाल झड़ने की समस्या Ayurveda

                      रूसी (Dandruff) परिचय :-  रुसी सिर में मरी हुई त्वचा के कण होते हैं, जो नई त्वचा के आने से हटते रहते हैं। इन्हीं कणों को रूसी कहते हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों में ही पाया जाता है। ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता कि उनके बालों में होने वाली रूसी तैलीय है या रूखी। रूखी रूसी के कण बहुत ही छोटे होते हैं, जो सिर की त्वचा से चिपके या बालों में फैले रहते हैं। ऐसी रूसी में बहुत खुजली होती है। जबकि तैलीय रूसी छोटे कणों के साथ सीबम से मिली होती है। कई बार रूसी ज्यादा हो जाने से बालों का गिरना भी शुरू हो जाता है।      रूसी बालों की सबसे बड़ी दुश्मन है। इसके कारण बाल अपना आकर्षण खो देते हैं। इस रोग के कारण सिर पर खुश्की होकर सफेद-सफेद रूसी बालों में हो जाती है। जब बालों में ब्रश या कंघा करते हैं या बालों को रगड़ते हैं तो यह बालों से निकलकर बाहर गिरने लगती है। यह खोपड़ी पर दाने या पपड़ी के रूप में भी निकल सकती है। यदि इन्हें बालों से बाहर न निकाला जाए तो यह वहां के रोमकूपों को बंद कर देती है।  ...

आयुर्वेद से ऊंचाई बढ़ाने के प्राकृतिक उपाय(Natural remedies to increase height with Ayurveda)

  आयुर्वेद से ऊंचाई बढ़ाने के प्राकृतिक उपाय आयुर्वेद, प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली, न केवल रोगों को ठीक करने के लिए जानी जाती है, बल्कि यह शरीर के समग्र विकास और संतुलन को भी बढ़ावा देती है। यदि आप अपनी ऊंचाई बढ़ाना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह जानना ज़रूरी है कि ऊंचाई मुख्यतः आनुवंशिक कारणों पर निर्भर करती है, लेकिन सही आहार, व्यायाम, और जीवनशैली से इसे बेहतर बनाया जा सकता है। ऊंचाई बढ़ाने में आयुर्वेद का दृष्टिकोण आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का विकास वात, पित्त और कफ दोषों के संतुलन पर निर्भर करता है। अगर ये दोष संतुलित हैं, तो शरीर का विकास सही ढंग से होता है। आयुर्वेद में विशेष जड़ी-बूटियों, आहार, और योग को अपनाकर हड्डियों और मांसपेशियों के विकास में सुधार किया जा सकता है। 1. आयुर्वेदिक आहार और जड़ी-बूटियां आहार शरीर के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में निम्नलिखित जड़ी-बूटियों और खाद्य पदार्थों को ऊंचाई बढ़ाने में सहायक माना गया है: अश्वगंधा अश्वगंधा (Withania Somnifera), जिसे "भारतीय जिनसेंग" भी कहते हैं, शरीर की...

बाल झड़ने की समस्या और आयुर्वेदिक उपचार (Hair Fall in Ayurveda)

  बाल झड़ने की समस्या और आयुर्वेदिक उपचार (Hair Fall in Ayurveda) बाल झड़ना (केशपात) आज के समय में एक आम समस्या बन गई है। आयुर्वेद में बालों की सेहत को शरीर के तीन दोषों (वात, पित्त, और कफ) के संतुलन से जोड़ा गया है। जब इन दोषों में असंतुलन होता है, तो इसका असर बालों की जड़ों और स्कैल्प पर पड़ता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं। बाल झड़ने के लक्षण (Symptoms of Hair Fall) 1. बालों का पतला होना: धीरे-धीरे बालों का घनत्व कम हो जाना। 2. गंजापन (Bald Patches): सिर के कुछ हिस्सों पर बालों का गायब होना। 3. कंघी करते समय बालों का टूटना: सामान्य से अधिक बालों का टूटना। 4. स्कैल्प का सूखा और परतदार होना: खुजली और रूसी का बनना। 5. बालों का समय से पहले सफेद होना: युवावस्था में ही बालों का सफेद होना। 6. जड़ों का कमजोर होना: हल्के खिंचाव पर भी बाल टूट जाना। बाल झड़ने के कारण (Causes of Hair Fall in Ayurveda) 1. पित्त दोष का असंतुलन: तीखा, तला-भुना और मसालेदार भोजन अधिक खाना। अत्यधिक तनाव और गुस्सा। 2. वात दोष का असंतुलन: शारीरिक कमजोरी और पोषण की कमी। बालों की सही देखभाल का अभाव। 3. कफ दोष का प्रभाव...

Ayurvedic knowledge unsustainable velocity (अधारणीय वेग)

  अधारणीय वेग( (वे वेग जो कभी नहीं रोकना चाहिए) १३ प्रकार के वेग किसी न किसी शरीर क्रिया से संम्बन्धित है जो स्वभाविक होते हैं। उन्हें यदि रोका जाता हैं तो अनेको व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती है। जिन्हें बुद्धिमान व्यक्ति कभी नहीं रोकते है। •>मूत्र रोकने से होने वाले रोग मूत्र कृच्छ, पेशाब में जलन, पेडू में दर्द, शिर में वेदना। •>पुरीष (मल) वेग को रोकने से होने वाले रोग सिर में दर्द, कोष्ठ वद्धता, आध् मान, उदरशूल। •>शुक्रवेग को रोकने से होने वाले रोग वृषण में दर्द, अंगमर्द, हृदय में वेदना, मूत्र का रूक-रूक कर आना। •>अपान वायु के वेग को रोकने से होने वाले रोग वात व्याधियाँ, कब्ज, उदर शूल, थकान, आध्मान। •>वमन का वेग को रोकने से होने वाले रोग कण्डू, भोजन में अरूचि, पाण्डू, ज्वर, चर्म विकार। •>छींक का वेग रोकने से होने वाले रोग शिरःशूल, जीर्ण, प्रतिश्याय, अर्दित। •>डकार के वेग को रोकने से होने वाले रोग हृदय और छाती में जकड़ाहट। हिचकी, श्वास, भोजन में अरूचि •>जम्हाई के वेग को रोकने से होने वाले रोग आक्षेप, शून्यता, शरीर तथा हाँथ पैरो में कम्प, उर्ध्वजत्रगुत रोग। •...