शरीर के वेग और उनसे उत्पन्न रोग/body movements and the diseases caused by them
शरीर के वेग और उनसे उत्पन्न रोग शरीर के १३ वेग ऐसे है जिसे रोकने से भारी शारीरिक और मानसिक परेशानी हो सकती है: 1•🌳साँस(breath) - साँस बन्द तो प्राण निकले। साँस जितना संभव गहरी उतनी तेज़ लेनी चाहिए जितना शरीर की माँग हो। 2•🌳 मूत्र(urine) - इसको रोकने सबसे बड़ा नुक़सान है मुत्र थैली में सक्रंमण होना का ख़तरा। लिंगेन्द्रियो मे दर्द होता है, मूत्र रुक रुक कर और कष्ट से होता है, सिर मे पीड़ा होतीं है, शरीर सीधा नहीं होता है, पेट मे आफरा तथा जांघोँ के जोड़ो मे शूल से चलतें है। आंखें की रोशनी कमजोर होती है। 3•🌳 पाखाना(toilet) - मल रूकने से गैस बनती है और गैंस से पेट फूल जाता है। पाखाना य मल के वेग रोक्ने से पेट मे गड़गड़ाहट और दर्द होता है, मल साफ़ नही होती है, डकारे आती है, ये लक्षण मध्वाचार्य ने लिखे है। मष्तिक में दर्द होता है। 4•🌳निन्द्रा(sleep) - इसके वेग को रोकने से जम्भाई, अंग टूटना, नेत्र और मस्तक का जङ हो जाना और तन्द्रा ये रोग होते है। निन्द्रा को रोकने से प्रतिरोधात्मक ...